मेडिटॉक - 'यूथ पॉवर के दम पर देश बनेगा वर्ल्ड लीडर'- ललित गौतम, उद्यमी,लेखक और वक्ता

भारत के पास ऐसी शक्ति है जो दुनिया के बाकी देशों के पास नहीं है वो है 'युवा शक्ति'. जी हां, इसी के दम पर हमारा देश आने वाले वक्त में दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क बनेगा. यह सोच है युवा उद्यमी ललित गौतम की.


हमारा देश युवाओं का देश है. इस युवा शक्ति से ही देश की तकदीर को बदला जा सकता है. मौजूदा कोविड-19 की संकट की घड़ी में युवाओं की भूमिका अहम है. खासकर ऐसे युवा जो उद्यमी हैं, और स्टार्टअप के क्षेत्र में नई सोच के साथ आगे बढ़ने की चाह रखते हैं. ऐसे ही एक एनर्जी से भरपूर युवा उद्यमी हैं ललित गौतम. इन्होंने सिर्फ 23 साल की उम्र में स्टार्टअप के क्षेत्र में कदम रख दिया था. और 29 साल के होते-होते उन्होंने चार स्टार्टअप की नींव रख दी. साथ ही ललित जी एक प्रखर वक्ता हैं, लेखक हैं और मेंटॉर भी हैं.

आपने बहुत कम उम्र में ही बिजनेस की कठिन राह पर कदम रख दिया, क्या आप शुरू से ही फोकस थे, कि मुझे इस क्षेत्र में ही जाना हैं?

ललित गौतम- बचपन से ऐसा कोई श्योर नहीं था कि मुझे बिजनेस के क्षेत्र में ही जाना है, हां, इतना ज़रूर था कि ग्रेजुएशन के दौरान मैंने यह सोच लिया था कि मुझे मास्टर डिर्गी लेनी है, और वो होगा एमबीए.  मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर लीडरशिप क्वालिटी है, साथ ही मुझे सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र की तरफ झुकाव भी होने लगा. एमबीए के आखिरी साल में मैंने यह फैसला कर लिया कि मुझे नौकरी नहीं करनी है. इसलिए स्टार्टअप की तरफ मैं सोचने लगा. मगर ऐसा कुछ जिसमें सामाजिक हित जुड़ा हो. यहां पर आप कह सकते हैं कि मैं पूरी तरह से फोकस था, बिजनेस के प्रति. जहां तक मेरे फैमली की बात है तो मैं एक ब्राह्ण परिवार से ताल्लुक रखता हूं, जिसका बिजनेस का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था, मैं अपने परिवार का पहला सदस्य हूं जो इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा हूं.

इस संकट के समय पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है, क्योंकि यहां यूथ की संख्या अधिक है, आपको क्या लगता है कि भारत युवा के दम पर विश्व का लिडर बन सकता है.

ललित गौतम- बिल्कुल, आपका कहना सही है. मैं दुनिया के कई मुल्कों में गया हूं और रहा भी हूं. बाकी देशों की तुलना में इंडिया के पास जो सबसे बड़ी ताकत है, वो है यूथ पावर. अधिकतर देशों के लोगों की उम्र बढ़ती जा रही है. मगर भारत ही एक ऐसा देश है जहां की सबसे ज्यादा आबादी युवाओं की है. आने वाला वक्त भारत का है और इसके पीछे है युवा शक्ति. आज का भारतीय युवा बेहद टैलेंटेड है. मेरा जहां तक विचार है युवा सिर्फ टेकनिकल फिल्ड में ही ना जाएं, बल्कि राजनीति में भी अपनी दमदार उपस्थित रखें. मगर हमारे युवाओं को अपनी सोच बढ़नी होगी. उन्हें अपना नजरिया ग्लोबल करना होगा, सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रखना होगा. मुझे पूरा यकीन है कि आने वाले वक्त में इंडिया अपने यूथ जेनरेशन के बल पर वर्ल्ड लीडर बनेगा.

आप ने दुनिया के तमाम युवाओं से भी बात की होगी, भारतीय युवा और दूसरे देशों के यूथ की सोच में क्या फर्क आपने महसूस किया है.

ललित गौतम- यह अच्छा प्रश्न है. मैंने पहले भी बताया है कि हमारे युवाओं की विजन सीमित है. मगर दूसरे खासकर विकसित देशों के युवाओ की सोच अलग होती है. देखिए ऐसे देशों में युवाओं के पास कई तरह की सुविधाए होती हैं जैसे एक तो बेरोजगारी भत्ता. इस हिसाब से ऐसे देशों के युवा भारतीयों की तुलना में संघर्ष नहीं किया है. मगर हमारे यहां संघर्ष बहुत है. इसी संघर्ष की वजह से हमारी सोच व्यापक नहीं रह जाती है. मैंने जब पहले स्टार्टअप की शुरूआत की थी तो मेरा फोसक विश्वव्यापी था. मगर जो मेरा वर्तमान प्रोजेक्ट है जो कि कृषि से जुड़ा है, इसमें मैंने यह नहीं सोचा था कि मैं सिर्फ अपने क्षेत्र,या राज्य या सिर्फ देश तक ही सीमित रहूंगा. मैंने पूरी दुनिया को सामने रखकर यह काम शुरू किया. कहने का मतलब है कि हमारे अंदर धैर्य तो बहुत है, मगर ग्लोबल विजन नहीं है. और एक बड़ा अंदर है हमारे और विदेशी युवाओं में कि हम खुद को कमतर आंकते हैं. इस सोच को बदलना होगा. अगर हमारे युवा अपने विजन और खुद को कमजोर समझना छोड़ दे तो वे पूरी दुनिया को अपनी मुठ्ठी में करने की ताकत रखते हैं.

आप एक उद्यमी हैं, स्पिकर हैं, लेखक हैं, मेंटॉर हैं, एक साथ इतनी सारी भूमिकाओं में खुद को कैसे एडजस्ट कर लेते हैं?

ललित गौतम- देखिए, मैं जो कर रहा हूं वो सब कहीं ना कहीं एक दूसरे से जुड़ा हुआ है,अलग नहीं हैं,  चाहे पब्लिक स्पिकिंग हो, या फिर सलाह देने का काम हो. आपको बता दूं कि ऐसे कई लोग आपको मिल जाएंगे जो नौकरी छोड़कर स्टार्टअप में आते हैं अपनी सोच लेकर, मगर होता क्या कि वे स्टार्टअप में भी आकर निवेशकों या अन्य की सोच से चलने लगते हैं. मेरे साथ ऐसा बिल्कुल नहीं हैं. मैं अपनी शर्तों पर काम करता हूं, लेखन या पब्लिक स्पिकिंग मेरी हॉबी है, मैं इसका कोई चार्ज नहीं लेता, मेरी रोजी-रोटी मेरे स्टार्टअप से बड़े आराम से चल रही है.

कोविड-19 के समय स्टार्टअप को आप किस पोजिशन में देखते हैं

कोविड-19 की वजह जो स्थिति उत्पन्न हुई है वो किसी भी स्टार्टअप के लिए बहुत ही कठिन समय है. मैं आपको सीधे शब्दों में बताता हूं कि स्टार्टअप शुरूआत से ही स्ट्रगल करते हैं. ऐसे समय में जहां कोई कैश फ्लो नहीं हो रहा है, कोई वृत्तीय गतिविधि नहीं हो रही हो, तो  स्टार्टअप संघर्ष करेंगे ही. इतना जरूर है कि जो पुराने स्टार्टअप हैं उन्हें उतना असर नहीं पड़ेगा, मगर कोविड-19 से थोड़े समय पहले शुरू हुए हैं उन पर ज्यादा असर पड़ेगा. हां, जो कोविड19 के बाद स्टार्टअप शुरू होंगे उनके काम करने का तरीका अलग होगा, उनके कस्टमर भी अलग सोच के होंगे. मगर मौजूदा समय में जो स्थिति है उसका असर आने वाले महीनों में दिखेगा.

 

Tags : #YouthPower #WorldLeader #LalitGautam #Startup

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Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

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