भारत में बाल-मृत्यु दर में आई कमी - संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

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कोरोना वायरस के बीच भारत के लिए एक अच्छी ख़बर है कि देश में बाल-मृत्यु दर में कमी आई है। यह बात हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट में बताई गई है।


देश में बढ़ती मेडिकल फैसिलिटी और जागरूकता की वजह से बाल-मृत्यु दर में बेहद कमी आई  है। लोग अब समय पर अपने बच्चों का टीकाकरण कराने के साथ-साथ उन्हें जरूरी पोषक तत्व भी दे रहे हैं। आर्थिक सुधार की वजह से भी यह संभव हो पाया है। 

स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों ने वर्ष 1990 से 2019 के बीच भारत में बालमृत्यु दर में गिरावट आने पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि प्रत्येक नवजात को गुणवत्तापूर्ण अहम स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं दे कर इस दर को और कम किया जा सकता है। 
     
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1990 से 2019 के बीच भारत की बाल मृत्यु दर में काफी गिरावट आई है। देश ने 1990-2019 के बीच पांच साल से कम आयु में मृत्यु दर में वार्षिक 4.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है। भारत में 1990 में पांच वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर 34 लाख थी जो 2019में घटकर 8,24,000 हो गई।
     
भारत में शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000 जीवित जन्म में मृत्यु) वर्ष1990 में 89 से घटकर पिछले साल 28 हो गई। देश में पिछले साल 6,79,000 शिशुओं की मौत हुई थी वहीं वर्ष 1990 में यह संख्या 24 लाख थी।

कोलिशन फॉर फूड एंड न्यूट्रीशन सिक्योरिटी(सीएफएनएस) के कार्यकारी निदेशक सुजीत रंजन ने कहा कि भले ही 1990 में 50लाख बच्चों के मरने की संख्या 2019 में 24 लाख रह गयी हो लेकिन बच्चों के जीवन के पहले 28 दिनों में मृत्यु का सबसे ज्यादा खतरा होता है।

रंजन ने कहा, ''भारत में पोषण पर की गई प्रगति की रक्षा करने के लिए सभी स्तर पर निरंतर नेतृत्व, ध्यान, वित्तपोषण और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।

बाल मृत्यु से संबंधित कुछ तथ्य

भारत में बाल मृत्यु के अधिकांश मामले नवजात मृत्यु से संबंधित हैं। नवजातों की मृत्यु का कारण समय पूर्व जन्म, अंतर्गर्भाशयी संबंधी घटनाएँ और नवजातों में होने वाला संक्रमण है। नवजात अवधि के बाद होने वाली मौतों का प्रत्यक्ष कारण डायरिया (Diarrhoea) और निमोनिया (Pneumonia) है। भारत में प्रति 1,000 बच्चों के जन्म पर 23 नवजातों की मृत्यु होती है। भारत की नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System- SRS), 2017 के अनुसार, भारत में उच्चतम नवजात मृत्यु दर वाले राज्य क्रमशः मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तर प्रदेश हैं, जहाँ प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर क्रमशः 32, 33 और 30 नवजातों की मृत्यु होती है। झारखंड, बिहार और उत्तराखंड में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में सर्वाधिक लैंगिक अंतराल देखा गया। ‘बर्डन ऑफ चाइल्ड मोर्टेलिटी’ (The burden of child mortality) के संदर्भ में उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक नवजात मृत्यु दर वाला राज्य है क्योंकि उत्तर प्रदेश में प्रत्येक वर्ष सर्वाधिक बच्चे जन्म लेते हैं तथा सर्वाधिक नवजातों की मृत्यु होती है। बर्डन ऑफ चाइल्ड मोर्टेलिटी को किसी राज्य की मृत्यु दर (बाल मृत्यु दर का अनुपात) और अनुमानित जनसंख्या (वार्षिक जन्मों की कुल संख्या) के आधार पर अनुमानित किया जाता है।

भारत में उचित उपायों को अपनाकर बाल मृत्यु को रोकने के लिये तेज़ी से प्रयास की तत्काल आवश्यकता है। नवजात शिशुओं की मृत्यु को उच्च गुणवत्ता वाली प्रसवपूर्व देखभाल, जन्म के समय कुशल देखभाल, माँ और बच्चे के जन्म के बाद उचित देखभाल से रोका जा सकता है।

Tags : #ChildMortality #childmortalityrate #childhealth #childcare #unitatednation

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Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

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