कोरोना काल में चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में लोकल बना वोकल

▴ कोरोना काल में चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में लोकल बना वोकल

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित कई स्टार्ट-अप, कई उपकरणों के जरिए रास्ता दिखा रहे हैं। इनमें वे स्टेथोस्कोप शामिल हैं जिनका इस्तेमाल डॉक्टर मरीज को छुए बिना कर सकते हैं।


क्या चिकित्सा उपकरणों को इस तरह से डिज़ाइन किया जा सकता है कि यह डॉक्टरों को सुरक्षित रख सके और कोविड-19 संकट की विशिष्ट आपातकालीन जरूरतों को पूरा कर सके?

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा समर्थित कई स्टार्ट-अप, कई उपकरणों के जरिए रास्ता दिखा रहे हैं। इनमें वे स्टेथोस्कोप शामिल हैं जिनका इस्तेमाल डॉक्टर मरीज को छुए बिना कर सकते हैं। ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर शामिल हैं जो अस्पताल में ही ऑक्सीजन पैदा करने में अस्पतालों की मदद कर सकते हैं। साथ ही इनमें पोर्टेबल एवं ऐप-नियंत्रित आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित वेंटिलेटर सिस्टम शामिल हैं।

कई भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं और स्वदेशी ऑटोमेशन कंपनियों ने महामारी को एक चुनौती के रूप में लिया और संपर्क में आए बिना रोगियों के इलाज एवं निगरानी के लिए वेंटिलेटर, पोर्टेबल रेस्पिरेटरी एड्स या उपकरणों के अभिनव डिजाइन पेश किए।

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने अपने ‘सेंटर फोर ऑगमेंटिंग वॉर विद कोविड-19 हेल्थ क्राइसिस’ (कवच) पहल के साथ पांच कंपनियों के वेंटीलेटर, रेस्पिरेटरी एड्स और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की तलाश की, उनका मूल्यांकन किया और उन्हें मदद उपलब्ध करायी। ये स्टार्टअप अब अपने उत्पादों को काम पर लगा चुके हैं।

वर्ष 2017 में आईआईटी बंबई में सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (साइन) में लगाए गए अयू डिवाइस ने एक डिजिटल स्टेथोस्कोप विकसित किया है जो डॉक्टरों को मरीजों से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए उनके की दिल और फेफड़े की आवाज सुनने में मदद कर सकता है। डिवाइस असामान्य आवाज की पहचान करता है और रोगियों का उपचार करने में मदद करता है। यह ब्लूटूथ रेंज के रूप में ब्लूटूथ रेंज को बढ़ाने और इसे दूर से नियंत्रित करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जहां मौजूदा डिजिटल स्टेथोस्कोप, स्मार्टफोन ब्लूटूथ का इस्तेमाल करते हैं, उनका डिवाइस डेटा में सीमा और स्थिरता बढ़ाने के लिए एक अतिरिक्त ब्लूटूथ मॉड्यूल के साथ काम करता है। यह स्पष्ट ध्वनि के लिए बाहरी शोर को हटाने की खातिर फिल्टर के साथ फिट भी है, यह भारतीय क्लीनिकल सेटिंग में इस्तेमाल करने योग्य है जहां ओपीडी में पीछे से काफी आवाज आती है। इसकी मदद से डॉक्टर पीपीई के साथ छाती की आवाज सुन सकते हैं जो पारंपरिक स्टेथोस्कोप के साथ संभव नहीं है।

सही समय पर डीएसटीसे मिली मदद से स्टार्टअप को पांच लीटर और 10 लीटर के ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर मॉडल और ऑक्सीमीटर के साथ-साथ उनके प्रयास को आगे बढ़ाने में प्रेरित किया। ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स के निर्माण के लिए विशाल सांचों की आवश्यकता होती है और डीएसटी से मिली सहायता ने उनकी जापान, अमेरिका और चीन के उत्पादों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के लिए गुणवत्ता वाले सांचों में निवेश करने में मदद की। आईआईटी दिल्ली की इनक्यूबेशन टीम ने तकनीक की सफलता तय करने के लिए उनके साथ काम किया।

वॉलनट मेडिकल, नवंबर के अंत तक सरकारी अस्पतालों को 50 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर दान में देगा और फिर उत्पाद को बाजार में लॉन्च करेगा।

पुणे की नोका रोबोटिक्स ने एक वेंटिलेटर विकसित किया है, जो इनवेसिव और नॉनइनवेसिव, दबाव-नियंत्रित मोड और कम वाट क्षमता की जरूरत के साथ सौर ऊर्जा से संचालित होता है। यह मेडिकल एयरलाइन और ऑक्सीजन के साथ-साथ परिवेशी वायु और ऑक्सीजन के साथ काम करता है और इसमें ऐप आधारित नियंत्रण और आईओटी सक्षम प्रणाली लगी है।

Tags : #coronaperiod #corona #coronaviurs

About the Author


Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

Related Stories

Loading Please wait...
-Advertisements-



Trending Now

सर्दी के मौसम में खुद को कैसे रखें फिट एंड फाइनNovember 26, 2020
इन घरेलू उपाए को अगर अपनाएंगे, तो आपकी त्वचा 60 साल में भी रहेगी चमकदार November 26, 2020
अब उत्तर प्रदेश में मास्क न पहनने वालों पर ड्रोन से रखी जाएगी नज़रNovember 26, 2020
ड्रग्स के सेवन से बन सकते हैं अपाहिज, हो सकते हैं टीबी की बीमारी के शिकार November 26, 2020
बच्चे में चिड़चिड़ापन का कारण हो सकता है, विटामिन डी की कमी- शोध में दावा November 26, 2020
भारत में कोरोना वैक्सीन के उत्पादन और वितरण पर चल रहा है तेजी से कार्य- डॉ. हर्षवर्धन November 26, 2020
कोरोना पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने जारी की नई गाइडलाइंस, 1 दिसंबर से होगा प्रभावीNovember 26, 2020
WHO ने कहा कोरोना काल में अधिकतर लोग हो गए हैं आलस्य के शिकार, बढ़ सकती है बीमारियांNovember 26, 2020
सावधान : सर्दियों में गर्म पानी से कितनी देर नहाना चाहिए? पहुच सकता है शरीर को नुकसानNovember 26, 2020
सावधान : हैजा हो जाने पर करे ये, जान भी जा सकती है November 26, 2020
इन आयुर्वेदिक तरीकों से अपनी पाचनशक्ति को बनाएं स्वस्थNovember 26, 2020
अखरोट और दूध का सेवन करने से मिलेगा इन बीमारियों से छुटकाराNovember 26, 2020
28 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जाएंगेNovember 26, 2020
देश - विदेश में बढ़ रही है औषधीय पौधों की डिमांड - आयुष मंत्रालयNovember 26, 2020
बिहार में मास्क नहीं पहनने पर अब लगेगा 5 सौ रुपए का जुर्मानाNovember 25, 2020
बिहार में मास्क नहीं पहनने पर अब लगेगा 5 सौ रुपए का जुर्मानाNovember 25, 2020
कोरोना काल में जन्में बच्चों का कैसे करें देखभालNovember 25, 2020
महाराष्ट्र में आने से 72 घंटे पहले यात्रियों को कोरोना की होगी जांच November 25, 2020
बवासीर के रोगियों के लिए मूली एवं इसके पत्तों की सब्जी खाना है बेहद फायदेमंदNovember 25, 2020
अच्छी नींद हार्ट अटैक के खतरे को करता है कमNovember 25, 2020