देश - विदेश में बढ़ रही है औषधीय पौधों की डिमांड - आयुष मंत्रालय

▴ देश - विदेश में बढ़ रही है औषधीय पौधों की डिमांड - आयुष मंत्रालय

औषधीय पौधों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, एनएमपीबी स्थानीय और बाहरी पौधों के संरक्षण और स्थानीय औषधीय पौधों और चिकित्सकीय महत्व की सुगंधित प्रजातियों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।


केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री श्रीपद येसो नाइक ने  राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा आयोजित ई-कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम बोर्ड ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया था। इस मौके पर "एनएमपीबी 2020 की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट" और "अयूर-वेज" ई-बुक का भी विमोचन किया गया।

आयुष मंत्री, सचिव (आयुष) वैद्य राजेश कोटेचा और बोर्ड के अन्य सदस्यों ने देश में औषधीय पौधों के क्षेत्र के विकास में योगदान तथा अन्य उपलब्धियों के लिए एनएमपीबी की सराहना की।

हाल के वर्षों में औषधीय पौधों की खेती में गति आयी है। हालाँकि, अभी भी हमारी आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वन स्रोतों से प्राप्त होता है। औषधीय पौधों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, एनएमपीबी स्थानीय और बाहरी पौधों के संरक्षण और स्थानीय औषधीय पौधों और चिकित्सकीय महत्व की सुगंधित प्रजातियों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। एनएमपीबी अनुसंधान और विकास तथा प्रशिक्षण के माध्यम से क्षमता निर्माण एवं होम / स्कूल हर्बल गार्डन बनाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देता है।

एनएमपीबी का मुख्य उद्देश्य विभिन्न हितधारकों अर्थात, किसानों, व्यापारियों और निर्माताओं के बीच मजबूत समन्वय के माध्यम से औषधीय पौधों के क्षेत्र का विकास है, ताकि सभी हितधारक लाभान्वित हो सकें। इस प्रयास से किसानों और जनजातियों की आय और आजीविका में वृद्धि होगी। इससे फसल कटाई के बाद किये जाने वाले प्रबंधन के माध्यम से उद्योग / निर्माताओं के साथ एकीकरण की सुविधा मिलेगी। नए आईटी उपकरणों और बाजार से जुड़ने की गतिविधियों से किसानों के साथ-साथ उद्योग को भी सहायता मिलेगी।

स्थापना दिवस के अवसर पर भारत में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए औषधीय पौधों के महत्व को रेखांकित किया गया। यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि औषधीय पौधे महत्वपूर्ण और रणनीतिक हैं क्योंकि दवाएँ, एक स्वस्थ आबादी को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं जो अर्थव्यवस्था को गति देती है। हालाँकि, औषधीय पौधों से छोटे और सीमांत किसानों समेत कृषि क्षेत्र में जो मूल्य संवर्धन किया जा सकता है, उसकी ओर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है। एनएमपीबी के एजेंडे में जागरूकता बढ़ाना और प्रेरणा देना प्रमुख कार्य हैं और इसने बड़े पैमाने पर औषधीय पौधों को अपनाये जाने और निरंतर बनाए रखने में सफलता पायी है। बोर्ड, औषधीय पौधों की खेती और उत्पादन के लिए निवेशकों को प्रोत्साहन प्रदान करता है।

विकासशील देशों में औषधीय पौधों के बढ़ते आर्थिक महत्व और देश में कृषि आय बढ़ाने के लिए इन्हें एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में केंद्र सरकार द्वारा विशेष ध्यान देने के बीच राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड (एनएमपीबी) ने अपने अस्तित्व के दो दशक पूरे कर लिए हैं।

24 नवंबर 2000 को तत्कालीन आयुष विभाग ने पर्यावरण और वन मंत्रालय, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) का गठन किया। वर्त्तमान में बोर्ड, आयुष मंत्रालय की अभिन्न इकाई है, जिसे उपरोक्त मंत्रालयों और विभागों का  परामर्श और समर्थन प्राप्त होता है। बोर्ड औषधीय पौधों के क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करता है।

औषधीय पौधों के उत्पादन के लिए स्वैच्छिक प्रमाणन योजना (वीसीएसएमपीपी) एनएमपीबी की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के समर्थन से तैयार की गई यह योजना किसानों के बीच खेती, खेत के संग्रह और औषधीय पौधों के उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के मामले में अच्छी प्रथाओं को प्रोत्साहित करती है। यह प्रमाणन कई मायनों में, गुणवत्ता आश्वासन का एक रूप है और इसके परिणामस्वरूप, औषधीय पौधों के उत्पादों का विपणन और निर्यात आसान हुआ है।

एनएमपीबी ने मेलों, प्रदर्शनियों, प्रजाति-विशिष्ट अभियानों आदि के माध्यम से देश भर में हजारों किसानों से संपर्क स्थापित किया है और व्यवसाय विकास के विभिन्न उपायों के माध्यम से उनका समर्थन किया है। इनमें ई- हर्ब  (जियो-टैगिंग और फील्ड डेटा एकत्र करने के लिए) और ई-चरक मोबाइल ऐप (बाजार की जानकारी के लिए) जैसे डिजिटल समाधान शामिल हैं। एनएमपीबी ने किसानों के लिए प्रासंगिक क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं का निष्पादन किया है, जैसे टिकाऊ कटाई, इंटरक्रॉपिंग और फ़सल कटाई के बाद प्रबंधन। निर्यात संवर्धन एक अन्य क्षेत्र है जिसमें इसने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
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