डेंटल कनेक्ट के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. सलिल चौधरी, नए दंत चिकित्सकों को दिखा रहे हैं आगे बढ़ने की राह

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कोरोना महामारी की वजह से मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों में भी एक भय व्याप्त है। इसकी वजह से क्लीनिक के बिजनेस पर प्रभाव पड़ा है। डेंटल कनेक्ट के मैनेजिंग पार्टनर डॉ. सलिल चौधरी कहते हैं कि हम पूरी सुरक्षा के साथ इलाज कर रहे हैं।


मेंटॉरिंग के माध्यम से ज्ञान, स्किल और जीवन के अनुभवों को दूसरों से साझा किया जाता है ताकि वे एक मार्गदर्शक के अनुभव का लाभ उठाकर अपने क्षेत्र में आगे बढ़े। मार्गदर्शक, उद्यमियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाते हैं, फिर भी इनके बीच मजबूत रिश्ते को कम ही महसूस किया जाता है। एक बेहतरीन सलाह व्यक्तिगत, अकादमिक और पेशेवर स्थितियों में युवाओं पर बेहतर प्रभाव डालता है और संबंध अधिक मजबूत बनते हैं।

डेंटल कनेक्ट के मैनेजिंग पार्टनर डॉ सलिल चौधरी एक एस्थेटिक टेंटिस्ट हैं जो  पिछले 8 साल से बैंगलोर में प्रैक्टिस कर रहे हैं । उन्होंने  डेंटल कनेक्ट की शुरूआत की है जो कि एकल दंत चिकित्सकों की मदद करने करता है कि कैसे वे आगे बढ़ सकते हैं साथ ही वे दंत चिकित्सा के प्रैक्टिस में मानक स्तर की प्रैक्टिस में हेल्प करते हैं।  इसके अलावा, वे सबसे अच्छी और सस्ती कीमत पर अपने रोगियों के नजदीक नैदानिक अभ्यास का सबसे अच्छा में लाने का प्रयास करते हैं ।

उचित कीमत पर डेंटल क्लिनिक की स्थापना

डॉ. सलील कहते हैं कि उन्होंने साल 2016 में इसकी शुरूआत की थी। इसका मकसत है कि लोगों को सस्ती दरों पर इलाज मुहैया हो। उनकी कोशिश है कि व्यवसायिक क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाय। अकेले प्रैक्टिस करना मुश्किल है, लिहाजा अन्य डेंटिस्टों को एक जगह पर लाने की कोशिश है। हमने अपने पार्टनरों के साथ काम शुरू किया। डेंटल कॉनेक्ट में हम सिर्फ पार्टनर नहीं है, बल्कि हम स्किल डेवलपमेंट के लिए ट्रेनिंग भी मुहैया कराते हैं।

दिशा दिखाने वाला होना ज़रूरी है

डॉ. सलील डेंटल कनेक्ट की स्थापना के लिए वे कई प्रकार से प्रेरित हुए। वे कहते हैं कि जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था, तो कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं मिला। उस वक्त बहुत कम ही लोग मेंटॉर की भूमिका निभा रहे थे। आठ साल बाद जब उन्हें मौका मिला तो वे अपने जुनियर्स की मदद के लिए आगे आए। मैं अपने एमबीए के तौरान , मैं अपने मेंटॉर डॉ. मुदित सक्सेना से काफी प्रभावित था। उन्होंने मुझे हेल्थकेयर मैनेजमेंट के बारे में गाइड किया। और आज भी मुझे किसी चीज में परेशानी होती है, तो उनसे ही मैं संपर्क करता हूं। इसलिए जब मुझे यह मौका मिला तो मैं भी लोगों की मदद के लिए आगे आया। वे डेंटल कॉन्सेप्ट के बारे में समझाते हुए कहते हैं कि इसके माध्यम से दूसरे डेंटल क्लिनिक को पार्टनर बनाया जाता है। इसका मकसद है कि दूसरे डेंटिस्टों की सहायता हो। यह आइडिया शायद भारत में सही नहीं माना जाता हो। और ऐसा कई कारणों से होता है। लिहाजा हमने यह डिसाइड किया कि हम एक चेन बनाएंगे और एक दूसरे की मदद करने के लिए एक कॉमन प्लेनफॉर्म पर आएंगे। इसके साथ ही डेंटल प्रैक्टिस में एक मानक तय किया जाएगा।

सलाहकार की भूमिका पसंद है

मेंटॉरशिप के तीन सी 1- कंन्सलटेंट 2- काउंसलर और 3- चियरलिडर  से  डॉ. सलिल कन्सलटेंट की भूमिका को चुनते हैं। वे कहते हैं कि मुझे सलाहकार की भूमिका बेहत पसंद है क्योंकि इस भूमिका में आप टीम के साथ बेहद करीब होते हैं, और उनकी जर्नी में साथ-साथ चलते हैं।

भारत में अपनी तरह के पहले डेंटल प्लेटफॉर्म की शुरूआत

डॉ. सलिल बताते हैं कि वे जल्द ही भारत का पहला एक्सक्लूसिव डेंटल प्लेटफॉर्म की शुरूआत करेंगे, जिसमें क्लीनिक, अकादमी, प्रशिक्षण और सामग्री सभी एक ही स्थान पर होंगे । वे कहते हैं, "यह मंच देश भर के दंत चिकित्सकों को एक साझा मंच के तहत लाएगा और देखभाल और व्यवहार में एकरूपता सुनिश्चित की जाएगी ।

न्यू नॉर्मल, दरअसल न्यू नॉर्मल नहीं है.।

डॉ. सलील कहते हैं कि न्यू नॉर्मल दरअसल नया नॉर्मल नहीं है। दरअसल यह सिर्फ हमारे कुछ प्रथाओं में याद रखने के लिए है। टेक्सट बुक्स में हमने कई प्रोटोकॉल के बारे में पढ़ा है, लेकिन कुछ ही इसका पालन कर रहे हैं। कोविड-19 के कारण सभी क्लीनिकों को एक मानकीकरण का पालन करना है। हमारे दैनिक दिनचर्या के अंदर एंबेडेट हो रहा है। तो सभी व्यवसायों को यह देखना चाहिए कि सभी बुनियादी से शुरू करें और हालत की आदत सभी को हो। डॉ सलिल बताते हैं, व्यापार फिर से उस स्तर पर वापस आ जाएगा जो पूर्व COVID था लेकिन तब तक हम सभी को विकास और विस्तार के बजाय बनाए रखने के बारे में सोचना चाहिए ।

 एक हेल्दी माउथ, पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है

डॉ. सलील ओरल हेल्थ और हाइजिन पर प्रकाश डालते हे कहते हैं कि हमें ओरल सिस्टम को समझते हैं और हमारी कोशिश है कि हम अपने रोगियों को इस बारे में जानकारी दें। हमारी कोशिश रहती है कि एक बेहतर माहौल में लोगों को डेंटल ट्रिटमेंट मिले। यह हमारे पूरे शरीर के हेल्थ पर प्रभाव डालता है। हम दंत चिकित्सा के प्रति पूरे मन से काम करते हैं और हमारी एनर्जी, पॉजिटिव रूप में सामने आना चाहिए। डेंटल कनेक्ट में डॉक्टरों की टीम के पास बहुत अनुभव है। वे कहते हैं कि हम केवल अनुसंधान और क्लीनिकल आधारित तकनीकों को इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है।

भारत में दंत चिकित्सा सैचुरेटेड नहीं है

डॉ. सलिल बातते हैं कि भारत में क्यों दंत चिकित्सा सैचुरेटेड नहीं है। वे कहते हैं कि यहां प्रतियोगिता बहुत अधिक है। इसमें कोई शक नहीं है कि एक डेंटल डॉक्टर को प्रैक्टिस स्थाई अवस्था में पहुंचने में समय लगता है। इसके पीछे की वजह से डेंटल जागरूकता की कमी। इसमें आहिस्ता-आहिस्ता सुधार हो रहा है। यहां कोई एक समान फीस नहीं है। अलग-अलग डेंटिस्ट की अलग-अलग फीस है। पेशेंट के द्वारा फीस में सौदेबाजी भी की जाती है। लिहाजा, नए डेंटिस्ट में यह भावना डालनी होगी कि मार्केट सैचुरेटेड है।

महामारी की वजह से व्यापार में गिरावट

डॉ. सलिल कहते हैं कि महामारी की वजह से बिजनेस में गिरावट आई है। इसकी वजह से न केवल मरीजों में बल्कि डॉक्टरों में भी डर की भावना देखी जा रही है। लेकिन हम सभी अपने क्लीनिक में सुरक्षा व्यवस्था के साथ इलाज कर रहे हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात में दंत चिकित्सकों में असंतुलन

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, आदर्श दंत चिकित्सक-जनसंख्या अनुपात 1:7500 है। विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकी के अनुसार - 2014, अनुपात 1:10000 था। वर्ष 2004 में भारत में शहरी क्षेत्रों में प्रति 10000 लोगों पर एक दंत चिकित्सक और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति डेढ़ लाख लोगों पर एक दंत चिकित्सक है।  डॉ सलिल स्वीकार करते हैं कि दंत पेशेवरों की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन है। वे कहते हैं असंतुलन स्पष्ट नहीं है, इसका बड़ा कारण निवेश है जो एक दंत सेटअप की आवश्यकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के निवेश की व्यवहार्यता है । इस मोर्चे पर भी सरकार ने हमें निराश किया है । क्योंकि जब वे सभी पीएचसी में एमबीबीएस करना जरूरी है तो उन्हें पीएचसी स्तर पर भी दंत चिकित्सकों के लिए बुनियादी ढांचा और नौकरियां पैदा करनी चाहिए थीं। जब तक सरकार दांतों को एक आवश्यक स्वास्थ्य घटक के रूप में देखने शुरू नहीं करेगी, जागरूकता नहीं फैलेगी । इसके अलावा, यह आवश्यक है कि दंत प्रक्रिया के लिए बीमा कवर दिया जाता है। इसलिए भारत में कॉलेजों से बाहर निकलने वाली बीडीएस प्रति वर्ष लगभग 30k है लेकिन इनमें से केवल 25-30% सक्रिय व्यवहार में रहता है । इसलिए हमारे पास देश में पर्याप्त दंत चिकित्सक हैं बशर्ते सभी अभ्यास कर रहे हों और इसके लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए ।

 

 

 

 

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Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

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