लॉकडाउन में स्टार्ट-अप्स कैसे सर्वाइव करें, जाने इनस्टार्टों के सीनियर एसोशिएट मानस वशिष्ठ से

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लॉकडाउन की वजह से स्टार्ट-अप्स के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। ऐसे समय इनस्टार्टो में सीनियर एसोशिएट मानस वशिष्ठ कहते हैं कि महामारी में किसी भी तरह की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।


इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वजह से एक संकट से गुजर रही है. लॉकडाउन की वजह आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई, जिसका सीधा असर व्यवसायियों पर पड़ा है, वे अपने भविष्य के प्रति चिंतित हैं।

इनस्टार्टो में सीनियर एसोशिएट मानस वशिष्ठ ने कोविड-19  के दौरान उद्यमिता पर प्रभाव डालने वाले कारकों पर प्रकाश डाला है।

डन और  ब्रैडस्ट्रीट के मुताबिक, कोविड महामारी ने मानव जीवन और वैश्वक आपूर्ति श्रृखंला का इतनी बुरी तरह से प्रभावित किया है। भारती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जो उपाए साल 2019 के अंत और साल 2010 की शुरूआत में किए गए थे, उस पर ग्रहण लग गया।

तो इस लेख को ध्यान से पढ़े ताकि आप उत्पन्न समस्या को समझे और इस दुविधा से निकलने का सही मार्ग चुन सकें।

रिसोर्स मैनेजमेंट के 5 स्टेप्स

मानस ऐसे पांच तरीके बता रहें हैं, जिनका पालन कर फोर्टफोलियो कंपनियां इस महामारी के प्रभाव से निजात पा सकती हैं.

मार्केटिंग खर्चों को कम करना कार्यालय व्यय (ओवरहेड्स) में कटौती करना, जहां तक संभव हो अगले 6 महीनों के लिए वेतन पुनर्गठन अनुबंधों पर निगोशिएशन

अपनी योजनाओं को स्थिगति करें, या इन पर अमल आहिस्ता-आहिस्ता 

स्टार्ट-अप्स अपने अस्तित्व को सुनिश्चित करें

मानस का मानना है कि महामारी के समय स्टार्ट-अप अपने संचालन की प्रक्रिया और रनवे पर निर्भर करेगा। शुरूआती दौर में स्टार्ट-अप के पास चुनौती है कि कैसे वे अपने अस्तित्व को बनाए रखे।

अस्तित्व को बनाए रखने के ले एक स्टार्ट-अप्स को अपने परिचालनों के पैमाने को कम करना होगा और साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके आगे पर्याप्त रनवे हो। महामारी के संबंध में सबसे बुरी बात यह है कि आप इस संबंध में किसी भी प्रकार की भविष्वाणी नहीं कर सकते हैं कि आगे क्या  होने वाला है। यहां तक किसी को यह भी अंदाजा नहीं था कि लॉकडाउन जैसी स्थिति उत्पन्न होगी और अचानक से मंदी का सामना करना पड़ेगा। इसलिए एक बार जब लॉकडाउन हट जाएगा, तो कस्टमर के लेनदेन पर असर पड़ेगा।

वे कहते हैं कि मुझे लगता है कि लॉकडाउन में सिर्फ सर्वाइवल ही मसला नहीं है, बल्कि इससे कुछ ज्यादा है। यह महामारी समाज को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है. इसलिए एक स्टार्ट-अप को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए और यह परिवकल्पना  करने की कोशिश करनी चाहिए कि भविष्य कैसा होने वाला है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके साथ संबंध कैसा रहने वाला है।

महामारी जैसी अनिश्चितता के समय कोई भी योजना नहीं बना सकता

मानस कहते हैं कि एक उद्यमी जोखिम उठाता है और अगर वह अच्छी तरह से काम कर जाता है, तो उसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। कोई भी महामारी जैसी अनिश्चतिता के समय सही योजना नहीं बना सकता है। वे कहते हैं कि इस तरह का कोई प्रोग्राम्ड मॉडल नहीं बना सकते हैं।

मौजूदा समय में कुछ भी साफ नहीं है, जो कि उद्योमियों के लिए चुनौती है। साथ कर्मचारियों, निवेशकों आदि के लिए भी चिंता बढ़ रही है।  

वे कहते हैं कि इस समय खुद का मनोबल ऊंचा रखने की ज़रूरत है। साध ही भविष्य की योजनाओं पर काम करने की भी आवश्यकता है। इन योजनाओं को नई कार्य-शैली को भी लागू करने की ज़रूरत है। इसलिए अनिश्चितता का प्रबंधन सही से करना होगा।

 परिवार के साथ समय गुजारकर, सबको साथ रखने में मदद मिली

हमने कभी-भी घर से काम करने को प्राथमिकता नहीं दी, लिहाजा पूरा का पूरा घर से काम करना कुछ अलग-सा रहा। हांलाकि, लॉकडाउन में मैंने अपनी फैमली के साथ अच्छा समय गुजारा और इससे मुझे काम करने में मदद भी मिली।

एक्शन कोविड19 टीम (एसीटी), जो कि बड़े वीसी औ.र उद्यमियों के द्वारा 100 करोड़ के अनुदान से स्टार्ट-अप और कर्मचारियों की मदद के लिए बनाया गया है। इसके कार्य को मानस ने सरहाना की है।

वे कहते हैं कि यह सही समय है न केवल भारत में बल्कि दुनिया के बाकी सक्षम लोग एक-दूसरे की मदद करने हेतु आगे आएं। इस तरह स्टार्ट-अप्स को को मदद मिल सकती है। ऐसा होना ही चाहिए।

निवेशकों के लिए अवसर

मंदी हमेशा जोखिमों के साथ निवेश के लिए अवसर भी लाते हैं। ऐसे समय में निवेश की कामयाबी की कई कहानियां हैं। मेरे मानना है कि ऐसे अवसरों के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश में बेहतर स्थिति है। इस समय अच्छा रिटर्न मिल सकता है, लेकिन निवेश सोच-समझकर ही करना होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tags : #medicirclerendezvous #manasvashistha #startups #entrepreneur #COVID #rendezvous

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Ranjeet Kumar

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