स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन की हेड-गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स एंड रिलेशंस की पिया सिंह कैसे करती हैं स्टार्ट-अप्स की मदद

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परिस्थितियां बदली हैं, और सारा काम अब डिजिटल रूप में हो रहा है। स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन की हेड-गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स एंड रिलेशंस की पिया सिंह कहती हैं कि बदलाव को हमें स्वीकार करना ही पड़ेगा, नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे।


मेंटॉरिंग से आपके भविष्य और करियर के विकास में मददगार साबित होता है। उद्यमशीलता उद्योग के लिए मेंटॉरिंग स्टार्टअप पूंजी के रूप में अपरिहार्य है। साथ हीं, अनुसंधान उद्यमशीलता सीखने के लिए मेंटॉरिंग के महत्व का पूरजोर समर्थन करता है। एक प्रबंध सबंध के विपरित, मेंटॉरिंग की वजह से दोनों पक्षों के रिश्ते मज़बत हो जाते हैं। मेंटॉरिंग के पीछे का एक उद्देश्य यह भी है कि यह एक सेमी चैरिटेबल काम है। अनुभव से आप अधिक सफल हो सकते हैं। जो उन्होंने सीखा है, उससे आपकी प्रगति में मदद मिलती है।

पिया सिंह, हेड-गवर्नमेंट इनिशिएटिव्स एंड रिलेशंस, स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन, एक स्ट्रैटजी कंसल्टेंट, लेखक और स्पीकर भी हैं । उन्होंने संचालन, संगठनात्मक विकास और रणनीतिक योजना में सरकारी, निजी और बहुराष्ट्रीय संगठनों में कई पदों पर काम किया है। वह संरेखित, नेतृत्व करने की क्षमता रखती हैं। साथ हीं वे 10 से 1000 लोगों से एक विश्व स्तरीय संचालन टीम विकसित कर सकती हैं। वे रणनीतिक योजना, संगठनात्मक विकास, या अपने व्यापार चुनौतियों के समाधान देने में कामयाब हैं।

समस्या का समाधान

पिया बताती हैं कि स्टार्ट-अप इंडिया फाउंडेशन का प्रमुख लक्ष्य है लोगों को अनुकूलित और लागत प्रभावी तरीके से मदद करना है।

वे कहती हैं कि उद्मी, जो एक व्यवसाय चलाते हैं, उन्हें कैसे आगे बढ़ना है। उनके काम में स्पष्टता लाने की कोशिश है। साथ ही वे 3 उत्प्रेरक की मदद से चुनौतियों का समाधान करते हैं। वे कहती हैं कि यही कारण है कि हमने अपने विभाग के व्यापार समाधान और सलाहकार का नाम दिया है। हम समस्या के मूल कारण को समझते हैं और सुधारात्मक कार्रवाई और निवारक कार्रवाई करते हैं।

अपनी पृष्ठभूमि से प्रेरणा लेना

 पिया एक मध्यम वर्ग की पृष्ठभूमि से आती हैं. और वे संक्षेप में कहती हैं कि यही उसे गाइड में मदद करने के लिए प्रेरित करती है कि दूसरों को सलाह देती हैं। एक औसत मध्यम वर्गीय परिवार के लिए यह कोशिश रहती है कि उनके बच्चे को अच्छी स्कूल में पढ़ाई हो। और इसके लिए पैसे का इंतजाम करें। यहां तक कि वे लोन भी लेते हैं। मैं ऐसी ही पृष्ठभूमि से आती हूं, जहां पैसों की जगह पर कल्चर और मूल्य को अहमियत दी जाती है। मैंने वो सब किया जो परिवार चाहता है। एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह सरकारी नौकरी नौकरी की और एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब भी की। मगर मैंने एक दिन इन सब पर सोचना बंद कर दिया। मुझे लगा कि नौकरी मेरा फ्यूजर नहीं है।

वो कहती हैं कि मैंने परामर्श की बारीकियां सीखीं। मैंने वो सबकुछ सीखा जो इसके लिए ज़रूरी होता है। मेरे पास एक ही ऑप्शन था स्टार्ट-अप और मैंने इसके लिए कोशिश भी की। इसी बीच मैं मां बन गई। मेरे सामने दो ऑप्शन था करियर या फिर मातृत्व। मैंने अपनी बेटी को चुना। एक सिंगल मदर क लिए ज़िंदगी इतनी आसान नहीं होती। उसे एक्सट्रा मेहनत करनी पड़ती है। फिर मैंने सोचा की अगर मैं स्टार्ट-अप नहीं कर सकती तो, कम से कम मैं दूसरों की मदद तो  कर सकती हूं, जो स्टार्ट-अप शुरू करना चाहते हैं।

समाधान के लिए व्यक्ति के पास जाना

मेंटॉरशीप की तीनों भूमिका 1- सलाहकार, 2- काउंसलर, और 3- चियरलिडर्स के बारे में पिया सोंचती हैं कि यह तीन उत्प्रेरक की दिलचस्प परिभाषा दी है। यह 3 भागीदार हैं। मेरा प्रमुख उद्देश्य परामर्श पर है। यह परामर्श और चियरलिंग के बीच सही संतुलन की तरह है।  मैं कीमेकर के तौर पर काम करती हूं और दो अन्य लाइवायर और मांडस्मिथ हैं। तकनीकी तौर पर हमारा ऑर्गेनाइजशन मदद करता है।

स्वास्थ्य सुविधाएं, घर तक पहुंचे

इस वक्त पिया अपना पूरा फोकस घर-घर स्वास्थ्य सुविधाओं पर कर रही है। वे कहती हैं कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की वजह से भारत के तीसरे और चौथे क्षेत्र में प्राथमिक हेल्थ केयर की सुविधा पहुंच सकती है।लिहाजा वो इसी दिशा में कार्य कर रही हैं।

नई परिस्थितियों का सामना

पिया कहती हैं कि वे खुश हैं कि कम से कम हम न्यू नॉर्मल के बारे में बात तो कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे असामान्य ही कहते हैं। मुझे लगता है कि जो वरिष्ठ हैं उन्हें इसमें दुविधा नज़र आ रही है। और वे नई चुनौतियों का सामना नहीं कर पा रहे हैं। पिछले आधे दशक से हम डिजिटलाइजेशन की बात कर रहे हैं, मगर अचानक बदलाव की वजह से कई लोग इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। जैसा कि एक पुरानी कहावत है, यदि आप इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं, तो इसे बदलें; लेकिन अगर आप इसे बदल नहीं सकते हैं, तो इसे स्वीकार करें। वे कहती हैं कि हमें आशावादी बनना होगा, इसे अवसर के रूप में लेना होगा। भौतिक से वर्जुल वर्ल्ड में जाना कठिन लग रहा होगा, मगर यह आसान है। बदलाव को स्वीकार करना ही होगा। वे कहती हैं, आपको एक विकल्प दिया जा रहा है-आभारी रहें, बदलाव को गले लगाएं और आगे बढ़ें ।

रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड में काम करने का आनंद उठाया

 पिया के पास संचालन, संगठनात्मक विकास और रणनीतिक योजना में सरकारी, निजी और बहुराष्ट्रीय संगठनों में काम करने के विभिन्न अनुभव हैं। लेकिन विशेष रूप से, रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड में काम करने का अलग मजा था। हालांकि हर क्षेत्र के उतार-चढ़ाव हैं, लेकिन मेरा अभी भी मानना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास तुलनात्मक रूप से अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर कार्य संस्कृति है । वह कहती हैं कि कार्यों के लिए के रूप में, कुछ भी है कि जीवन को बेहतर बनाने शामिल है एक स्वागत योग्य क्षेत्र है, हालांकि, मेरा पसंदीदा क्षेत्र है "रणनीति" ।

पहली बार स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन ने की उद्यमियों की मदद

पिया बताती हैं कि कैसे स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन पहली बार उद्यमियों की मदद कर रहा है, "यह वह सब कुछ प्रदान करता है जो पहली बार उद्यमी को एक मंच पर चाहिए । एक पैलेट पर सेवा की, अगर आप कह सकते हैं कि! बूट कैंपों से लेकर इनक्यूबेशन और मेंटरशिप तक स्टार्टअप इंडिया फाउंडेशन के पास विभिन्न क्षेत्रों और क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं जो आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि कोई खास विचार या प्रोटोटाइप एक बिजनेस सॉल्यूशन के रूप में कैसे काम करेगा और फिर आपको इसे करने में भी मदद करेगा ।

महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता

पिया कई भूमिकाओं में अपना हुनर दिखा रही हैं। वह स्टार्टअप्स के साथ-साथ बिजनेस विस्तार के लिए मेंटर बनने का उपक्रम कर रही हैं,  वह महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता पर एक सामुदायिक वक्ता हैं । लेकिन वह उल्लेख करती हैं कि महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को पसंद करती हैं। "मैं कोर करने के लिए एक नारीवादी हूं, शब्द के सही अर्थों में । यह वही है जो मुझे आईटीसी SheTrades पर महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों के लिए एक संरक्षक होने के लिए नेतृत्व किया । वे कहती हैं, यही कारण है कि आप मुझे महिला सशक्तिकरण के बारे में सबसे अधिक बार बात करते हुए देखते हैं, और जहां तक मेरे समय का संबंध है, आप समझ गए होंगे कि  एक महिला के स्वामित्व वाले व्यवसाय को अन्य स्टार्ट-अप्स पर प्राथमिकता क्यों मिलती है ।

 अपने लोगों के साथ खड़े हो जाओ और समाधान का पता लगाएं

पिया अपने कुछ व्यक्तिगत विचारों को शेयर करती हुई कहती हैं कि जब उलक्षण होती है तो वो ओके कहती हैं। ओके डराता है। आगे क्या होने वाला है इससे अनजान होते हैं। अपने बिजनेस या उद्योग के एक लिडर के रूप में लोग आप की तरफ देखते हैं। न सिर्फ समस्या की समाधान के लिए बल्कि इस उद्द्श्य से भी की आप हमेशा उसके साथ खड़े रहेंगे। समाधान तलाश करने की कोशिश करें। अनिश्चितता के दौर में आप समस्या का समाधान खोजने पड़ेंगे। खुद को आंके की आप कहां हैं और आप कहां जाना जाते हैं। और फिर ऐसा करने का का एक तरीका खोजें जो कम जोखिम वाला हो और लंबे समय तक टिकाउ हो।  

 

 

 

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About the Author


Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

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