देश के युवा चिकित्सा और विज्ञान क्षेत्र में आगे आएं - डॉ. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

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वैसे तो हमेशा से विज्ञान का महत्व रहा है, मगर कोरोना काल में इसकी अहमियत और भी बढ़ गई है। भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत काम होना बाकी है, जिसमें युवाओं की भूमिका अहम होने जा रही है।


सरकार की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) नीति में देश के विद्यार्थियों/ युवाओं  को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रोत्‍साहित करना शामिल है। डीबीटी वंशानुगत एवं आणविक स्‍तर पर मानव रोगों के कारण को समझने के लिए किफायती स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल आर एडं डी को सहायित कर रहा है जिससे संक्रामक रोगों, पुराने रोगों, मानव वंशानुगति एवं जीनोम विश्‍लेषण, मातृ एवं बाल स्‍वास्‍थ्‍य, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण, टीका अनुसंधान, जैव अभियांत्रि‍की एवं बायो डिजाइन, स्‍टेम कोशिका और पुनरूत्‍पादक औषध जैसे क्षेत्रों में नवप्रवर्तक चिकित्‍सा अथवा निवारक उपायों का क्रम-विकास और आरंभिक पहचान संभव होती है। डीबीटी वाणिज्‍यीकरणार्थ त्‍वरित अंतरण अनुदान (एटीजीसी) कार्यक्रम के अंतर्गत अनुप्रयोग के क्रम-विकास के लिए अंतरण अनुसंधान को भी सहायित कर रहा है। एटीजीसी शैक्षिक अनुसंधानकर्त्ताओं को स्‍थापित प्रूफ-ऑफ-कॉनसेप्‍ट वाले उनके प्रयोगशाला अनुसंधान नमूनों को अगले चरण तक ले जाने में समर्थ बनाता है।

वर्ष 2013 की विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवोन्‍मेष (एसटीआई) नीति के प्रथम तीन मुख्‍य घटक हैं:

समाज के सभी स्‍तरों में वैज्ञानिक प्रवृत्ति के प्रसार का संवर्धन करना। सभी सामाजिक स्‍तरों के युवाओं में विज्ञान के अनुप्रयोगों संबंधी कौशल का विकास करना। विज्ञान, अनुसंधान तथा नवोन्‍मेष में कैरिअर निर्माण को प्रतिभावान एवं तीव्र बुद्धि वाले छात्रों के लिए आकर्षक बनाना।

सरकार देश के विद्यार्थियों/युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आने के लिए आकर्षित करने हेतु कई स्‍कीमें कार्यान्वित कर रही है। ‘’अभिप्रेरित अनुसंधान के लिए विज्ञान की खोज में नवोन्‍मेष (इस्‍पायर)’ मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विज्ञान विषय का अध्‍ययन करने तथा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) में कैरियर का विकल्‍प देने की दृष्टि से उन्‍हें आकर्षित, अभिप्र‍ेरित, पोषित तथा प्रशिक्षित करने वाली कार्यशील बड़ी स्‍कीम है जिससे गुणवत्तापूर्ण जनशक्ति के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होने के परिणामस्‍वरूप देश में आरएंडडी जनशक्ति के स्रोत का विस्‍तार हो सकता है। देश भर के सभी मान्‍यताप्राप्‍त विद्यालयों की छठी – दसवीं कक्षा के लगभग 42,000 युवा छात्र इंस्‍पायर पुरस्‍कार मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नैशनल इंस्पिरेशन एंड नॉलेज) प्रति वर्ष प्राप्‍त करते हैं। प्रति वर्ष लगभग 20,000 छात्र विज्ञान के सृजनात्‍मक कार्य का रोचक अनुभव प्राप्‍त करने के लिए इंस्‍पायर प्रशिक्षुतावृत्ति कैंपों में हिस्‍सा लेते हैं। 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में उत्‍तीर्ण शीर्ष 1%, में लगभग 10,000 छात्र मूलभूत एवं प्राकृतिक विज्ञान में बी.एससी. और एम.एससी. पाठ्यक्रमों का अध्‍ययन करने के लिए उच्‍चतर शिक्षा छात्रवृत्ति (एसएचई) प्रति वर्ष प्राप्‍त करते हैं। प्रत्‍येक वर्ष, लगभग 1,000 छात्र पी.एचडी. उपाधि के अनुशीलन के लिए इंस्‍पायर अध्‍येतावृत्ति प्राप्‍त कर रहे हैं। प्रति वर्ष 100 युवा अनुसंधानकर्ता अनाश्रित पोस्‍ट डॉक्‍टरल अनुसंधानकर्ताओं के रूप में स्‍वयं को स्‍थापित करने के लिए इंस्‍पायर संकाय अध्‍येतावृत्तियां प्राप्‍त कर रहे हैं। युवा छात्रों को आ‍कर्षित एवं प्रेरित करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा लिंडो मीटिंग विद नोबल लॉरेट्स, एशियन साइंस कैंप्‍स, रमन चार्पाक फेलोशिप, सकूरा एक्‍सचेंज प्रोग्राम आदि जैसे कई अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों का कार्यान्‍वयन भी किया जा रहा है।

डीएसटी प्रक्षेत्र के स्‍वायत्‍त संस्‍थान भी बडी संख्‍या में ग्रीष्‍म अनुसंधान प्रशिक्षुओं, पीएच.डी. तथा पोस्‍ट डॉक्‍टरल अध्‍येताओं को प्रशिक्षण देते हैं, बडी संख्‍या में महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन आयोजित करते हैं, अपने वैज्ञानिकों द्वारा व्‍याख्‍यानों, अभिविन्‍यास कार्यक्रमों आदि सहित प्रसार कार्यक्रम विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्रों के लिए आयोजित करते हैं।

डीएसटी का सांविधिक संस्‍थान, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी), अर्ली कैरिअर अनुदान, मूल अनुसंधान अनुदान, डॉक्‍टरल तथा पोस्‍ट डॉक्‍टरल अध्‍येतावृत्तियों आदि के जरिए महत्‍वपूर्ण तरीके से युवा अनुसंधानकर्ताओं को सहायित करता है। युवा वैज्ञानिकों के लिए लक्षित कुछ उल्‍लेखनीय कार्यक्रमों में शामिल हैं: राष्‍ट्रीय पोस्‍ट डॉक्‍टरल अध्‍येतावृत्ति (एन-पीडीएफ), स्‍टार्ट अप अनुसंधान अनुदान (एसआरजी), प्रधानमंत्री डॉक्‍टरल अनुसंधान अध्‍येतावृत्ति, स्‍वर्णजयंती अध्‍येतावृत्तियां आदि। ये स्‍कीमें उदीयमान युवा अनुसंधानकर्ताओं की पहचान करने और उन्‍हें विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के अग्रणी क्षेत्रों में प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के अवसर उपलब्‍ध कराने के लिए तैयार की गई हैं। लगभग 250 युवा अनुसंधानकर्ता राष्‍ट्रीय पोस्‍ट डॉक्‍टरल अध्‍येतावृत्ति प्रति वर्ष प्राप्‍त करते हैं। स्‍टार्ट अप अनुसंधान अनुदान के अंतर्गत सहायित 500 वैज्ञानिकों में से अधिकांश नवोदित युवा अनुसंधानकर्ता हैं जो देश में उच्‍च परिणामप्रद अनुसंधान एवं विकास का काम करते हैं। प्रधानमंत्री डॉक्‍टरल अनुसंधान अध्‍येतावृत्ति के अंतर्गत उद्योग जगत की भागीदारी में पीएच.डी. के अनुशीलन हेतु अनुसंधानकर्ताओं के लिए 100 अध्‍येतावत्तियां प्रति वर्ष उपलब्‍ध होती हैं।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) युवा एवं होनहार अनुसंधानकर्त्ताओं को अपनी कनिष्‍ठ अनुसंधान अध्‍येतावृत्ति-राष्‍ट्रीय पात्रता परीक्षा (जेआरएफ नेट), श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी अध्‍येतावृत्ति (एसपीएमएफ), वरिष्‍ठ अनुसंधान अध्‍येतावृत्त्‍िा (एसआरएफ-डायरेक्‍ट), अनुसंधान सहायकवृत्ति और सीएसआईआर-नेहरू विज्ञान पोस्‍ट-डॉक्‍टरल अनुसंधान अध्‍येतावृत्त्‍िा (सीएसआईआर-एनएसपीडीएफ) जैसे विभिन्‍न अध्‍येतावृत्ति कार्यक्रमों के माध्‍यम से डॉक्‍टरल एवं पोस्‍ट-डॉक्‍टरल अध्‍येतावृत्ति प्रदान कर रही है। सीएसआईआर उन युवा विद्यार्थियों को लगभग 4500-5000 ऐसी अध्‍येतावृत्त्‍िा प्रतिवर्ष प्रदान करती है जो भविष्‍य में वैज्ञानिक बनने वाले हैं। किसी प्रदत्त समय में, सीएसआईआर लगभग 8000-9000 युवा अनुसंधानकर्त्ताओें को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके डॉक्‍टरल एवं पोस्‍ट-डॉक्‍टरल अनुसंधान कार्य में सहायता देती है।  

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान के क्षेत्रों में स्‍नातक-पूर्व विज्ञान शिक्षा, स्‍नातकोत्तर शिक्षण कार्यक्रम, डीबीटी-‍कनिष्‍ठ अनुसंधान अध्‍येतावृत्ति कार्यक्रम, डीबीटी-अनुसंधान सहायकवृत्त्‍िा और डीबीटी-जैवप्रौद्योगिकी उद्योग प्रशिक्षण (प्रशिक्षुता) कार्यक्रम के सुदृढ़ीकरण के लिए स्‍टार कॉलेज स्‍कीम सहित जैव प्रौद्योगिकी में समेकित मानव संसाधन विकास कार्यक्रम को कार्यान्वित किया है।

सरकार ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किफायती सतत नवप्रवर्तनों को बढ़ावा देने के लिए अनेक उपाय किए हैं। डीएसटी ने नवप्रवर्तक विचार को किसी नवप्रवर्तक द्वारा विकसित कार्यशील प्रोटोटाइप में परिवर्तन के कार्य में सहायित करने के प्रयोजनार्थ राष्‍ट्रीय नवप्रवर्तन प्रगत निर्माण एवं उपयोग पहल (निधि) के अंतर्गत युवा एवं आकांक्षी प्रौद्योगिकी उद्यमी प्रोत्‍साहन एवं त्‍वरण (प्रयास) नामक नया कार्यक्रम वर्ष 2016 में आरंभ किया । इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य बड़ी संख्‍या में उन युवा नवप्रवर्तकों को आकर्षित करना है जो समस्‍या समाधानकारी उत्‍साह एवं क्षमता प्रदर्शित करते हैं और साथ ही, जो गुणवत्ता एवं संख्‍या की दृष्टि से पाइपलाइन में रहे नवप्रवर्तक स्‍टार्ट-अप को उद्भवकों में संवर्द्धित करते है। यह नवप्रवर्तकों, शिक्षाजगत, परामर्शदात्ताओं और उद्भवकों का नेटवर्क बनाकर सक्रिय नवप्रवर्तक पारितंत्र का निर्माण करेगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किफायती सतत नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिए, राष्‍ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्‍ठान (एनआईएफ), जो डीएसटी के अंतर्गत एक स्‍वायत्त संस्‍था है, द्विवार्षिक राष्‍ट्रीय मूलभूत नवप्रवर्तन एवं उत्‍कृष्‍ट पारंपरिक ज्ञान पुरस्‍कार आयोजित करता है और इसके लिए, आम लोग (युवा सहित ) अपने विचारों और नवप्रवर्तनों को साझा करते हैं। एनआईएफ नवप्रवर्तकों को मूल्‍य संवर्द्धन एवं उद्भवन सहायता उपलब्‍ध कराता है ताकि उनकी प्रौद्योगिकियॉं बाजार तक पहॅुच सकें। एनआईएफ ने एनआईएफ उद्भवन एवं उद्यमिता परिषद (एनआईएफ-आईईएनटीआरईसी) भी गठित की है जो देश के आम लोगों की नवप्रवर्तक प्रौद्योगिकियों पर आधारित वाणिज्यिक उद्यमों को स्‍थापित एवं उद्भवित करने के लिए प्रौद्योगिकी कार्य उद्भवक है।

सीएसआईआर इस प्रयोजनार्थ, विभिन्‍न श्रेणियों नामत: केन्द्रित मूलभूत अनुसंधान, अभिनव सृजक परियोजनाओं, फास्‍ट ट्रेक अंतरण परियोजनाओं, फास्‍ट ट्रेक वाणिज्‍यीकरण परियोजनाओं, हरित परियोजनाओं और मिशन परियोजनाओं में आरएंडडी के साथ-साथ अंतरण परियेाजना कार्यान्वित कर रही है। 

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री और पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री,  डा. हर्ष वर्धन ने आज राज्य सभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से यह जानकारी दी।

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Ranjeet Kumar

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री. न्यूज़ चैनल, प्रोडक्शन हाउस, एडवरटाइजिंग एजेंसी, प्रिंट मैगज़ीन और वेब साइट्स में विभिन्न भूमिकाओं यथा - हेल्थ जर्नलिज्म, फीचर रिपोर्टिंग, प्रोडक्शन और डायरेक्शन में 10 साल से ज्यादा काम करने का अनुभव.
नोट- अगर आपके पास भी कोई हेल्थ से संबंधित ख़बर या स्टोरी है, तो आप हमें मेल कर सकते हैं - [email protected] हम आपकी स्टोरी या ख़बर को https://hindi.medicircle.in पर प्रकाशित करेंगे

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